2013/04/28

कुंडली का दूसरा भाव

                                                                  चित्र क्रमांक ३



मनुष्य के जन्म के पश्चात अर्थात शरीर प्राप्त करने के पश्चात शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन,या अन्य शब्दों में शरीर को उर्जा प्रदान करने के लिए भोज्य पदार्थों की आवश्यकता होती है ! इसलिए मनुष्य को प्राप्त होने वाला भोज्य पदार्थ इत्यादि कुंडली के दुसरे भाव से विचारें जाते हैं ! मनुष्य के लिए जीवन प्राप्त करने के बाद दूसरी आवश्यकताओं की श्रेणी में परिवार,धन संपत्ति, उसकी आर्थिक स्तिथि, लाभ हानि,वस्त्र आभूषण,रत्न एवं अन्य मूल्यवान वस्तुएं,धन सम्बन्धी दस्तावेज,मनुष्य की वाक् शक्ति, घर,कुटुंब,पति या पत्नी के घर से सम्बन्ध,धन संग्रह,नेत्र दृष्टि या देखने की क्षमता, दाहिनी आँख,कल्पना शक्ति,मनुष्य का विकास,पत्नी की आयु ,मृत्यु,धन संग्रह, वाणी,विद्वता आदि का विचार कुंडली के दुसरे भाव से किया जाता है ! इस भाव का प्रभाव मनुष्य के शरीर पर  कंठ, नेत्र, मुख, जीभ,नाक,दांत,ठोड़ी, गले, और नाख़ून पर होता है! स्मरण रहे यह ज्योतिष अनुसार एक मारक स्थान या भाव भी है !   



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